AI Chatbots: क्या AI से सीक्रेट्स शेयर करते हैं? जान लीजिए, आपकी चैट्स को नहीं है निजता का अधिकार

Suyash Pandey
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीSuyash Pandey
Fri, 17 Apr 2026 11:42 PM IST
सार

AI Chatbot Privacy Risk:

क्या आप भी ChatGPT या Gemini जैसे AI टूल्स के साथ अपनी पर्सनल, कानूनी या सीक्रेट बातें शेयर करते हैं? अगर हां, तो आपको सावधान होने की जरूरत है। कानूनी जानकारों ने चेतावनी दी है कि AI के साथ की गई आपकी चैट प्राइवेट नहीं है और जरूरत पड़ने पर इसे कोर्ट में सबूत के तौर पर भी पेश किया जा सकता है।

AI chats not fully private: conversations on chatgpt, claude, gemini can be used as court evidence
ChatGPT और Gemini के साथ आपकी चैट प्राइवेट नहीं है (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : AI

    विस्तार

    अगर आप ChatGPT, Claude या Gemini जैसे AI चैटबॉट्स को अपना सुरक्षित स्थान मानकर उनसे अपने सीक्रेट्स या गंभीर बातें शेयर करते हैं तो आपको थोड़ा सतर्क होने की जरूरत है। कानूनी जानकारों ने चेतावनी दी है कि AI चैटबॉट्स के साथ आपकी बातचीत पूरी तरह से प्राइवेट नहीं है। यहां तक कि जरूरत पड़ने पर इसे कोर्ट में सबूत के तौर पर भी दिखाया जा सकता है। सुनने में यह थोड़ा अजीब और डरावना लग सकता है, लेकिन हाल ही में इससे जुड़ा एक असली मामला सामने आया है।

    क्या है पूरा मामला?

    यह चर्चा अमेरिका के एक कोर्ट के फैसले के बाद शुरू हुई। दरअसल, एक बिजनेसमैन ने अपने कानूनी मामले से जुड़े कुछ जरूरी डॉक्यूमेंट्स का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए एक AI चैटबॉट की मदद ली थी। बाद में उसने अपनी इन AI चैट्स को कोर्ट से छिपाने और प्राइवेट रखने की कोशिश की, लेकिन कोर्ट ने इससे साफ इनकार कर दिया।

    जज ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि किसी AI टूल से बात करना, किसी असली वकील से बात करने जैसा नहीं है। इसलिए, AI के साथ की गई बातचीत को वह कानूनी निजता नहीं मिल सकती, जो एक क्लाइंट और वकील के बीच की बातचीत को मिलती है। इसका नतीता ये हुआ कि, बिजनेसमैन को वे सभी AI-जनरेटेड डॉक्यूमेंट्स सरकारी वकीलों और कोर्ट के साथ शेयर करने पड़े।

    AI चैट्स को कानूनी सुरक्षा क्यों नहीं मिलती?

    इसकी वजह बहुत ही आसान है। दरअसल, जब आप किसी असली वकील से बात करते हैं तो आपकी वह बातचीत कानून द्वारा पूरी तरह सुरक्षित होती है और आपकी मर्जी के बिना कोई उसे नहीं जान सकता। लेकिन, AI टूल्स के साथ निजता का ऐसा कोई नियम लागू नहीं होता क्योंकि वहां 'वकील और क्लाइंट' वाला कोई रिश्ता नहीं है।

    ऐसे में, भले ही आप AI से कोई बहुत ही गंभीर बात, कानूनी सलाह, पर्सनल प्रॉब्लम या बिजनेस से जुड़ा कोई बड़े फैसले पर चर्चा कर रहे हों, कानून की नजर में इसे बस किसी 'थर्ड पार्टी' के साथ साझा की गई जानकारी ही माना जाएगा। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि कुछ मामलों में तो अपने वकील की दी गई सलाह को भी AI टूल पर टाइप करने से आपकी कानूनी निजता खतरे में पड़ सकती है और वह जानकारी पब्लिक या कोर्ट के सामने आ सकती है।

    लोग कर रहे हैं ये आम गलती

    कोर्ट-कचहरी से अलग भी एक बड़ी समस्या यह है कि लोग AI का इस्तेमाल बहुत ही 'कैजुअल' तरीके से करने लगे हैं। कई यूजर्स चैटबॉट्स के साथ अपनी पर्सनल और सेंसिटिव जानकारी शेयर कर देते हैं। वे उनसे कानूनी या मेडिकल सलाह मांगते हैं और उन्हें अपना भरोसेमंद असिस्टेंट मान लेते हैं।

    लेकिन, ज्यादातर AI प्लेटफॉर्म्स साफ तौर पर यह बताते हैं कि यूजर्स को प्रोफेशनल सलाह के लिए उन पर पूरी तरह से निर्भर नहीं रहना चाहिए। इसके अलावा, इन कंपनियों की डेटा पॉलिसी में भी यह लिखा होता है कि वे अपनी सर्विस सुधारने के लिए आपके डेटा का इस्तेमाल या उसे शेयर कर सकते हैं।

    तो आपको क्या करना चाहिए?

    कानूनी जानकारों और टेक एक्सपर्ट्स की सलाह एकदम साफ है कि आप AI के साथ क्या शेयर कर रहे हैं, इसे लेकर हमेशा सावधान रहें। अगर कोई बात बहुत ही सेंसिटिव या सीक्रेट है तो अपनी गोपनीय जानकारी (जैसे- पासवर्ड, बैंक डिटेल्स या सीक्रेट बिजनेस प्लान) किसी भी AI चैटबॉट पर टाइप करने से बचें।

    इसके अलावा, यह समझना भी बहुत जरूरी है कि AI कोई वकील नहीं है, इसलिए इसे किसी असली एक्सपर्ट या कानूनी सलाहकार का विकल्प बिल्कुल न समझें। सबसे अहम बात, किसी भी AI टूल का इस्तेमाल करने से पहले उसकी डेटा पॉलिसी जरूर चेक करें, ताकि आपको यह साफ तौर पर पता रहे कि आप अपना कौन सा कीमती डेटा इन AI कंपनियों के हाथों में सौंप रहे हैं।

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