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UNICEF India: यूनिसेफ और किलकारी ने इस बेटी के सपने किए पूरे, करियर की मुश्किल राहें बना दी आसान

बिहार की कुश्ती खिलाड़ी कोमल कुमारी
                
                                                         
                            
UNICEF India: भारत में किलकारी योजना के जरिए बहुत सारे लोगों की मदद की जा रही है। किलकारी योजना 8 से 16 वर्ष के बच्चों के लिए कार्य करती है। इस योजना के तहत बच्चों और किशोरियों के भविष्य को संवारने के लिए कई सारी सुविधाएं और स्कॉलरशिप दी जाती है। सरकार द्वारा इस कार्यक्रम की शुरुआत करने का उद्देश्य बच्चों को फाइन आर्ट्स, क्राफ्ट, रचनात्मक लेखन और खेल आदि सह पाठ्यक्रम गतिविधियों में प्रशिक्षित करना और आत्मविश्वास जगाना है। किलकारी कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय संगठन संयुक्त राष्ट्र बाल कोष सहयोग कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) का कार्य दुनियाभर के देशों के बच्चों और किशोर-किशोरियों के लिए रहने योग्य समाज बनाना और जरूरत की सुविधाएं उपलब्ध कराना है। यूनिसेफ भारत में बच्चों, गर्भवती महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य, शिक्षा और समग्र विकास के लिए कार्य कर रहा है। यूनिसेफ के इस प्रयास में भारत सरकार, कई सरकारी और गैर सरकारी संस्था और राज्य सरकारें भी शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष की ओर से भारत के बच्चों और किशोरियों के लिए किए जा रहे प्रयासों की सीरीज में आज बिहार की एक ऐसी बेटी के बारे में जानेंगे, जो अपनी मेहनत और यूनिसेफ की मदद से आज सभी के लिए प्रेरणा बन गई हैं। इस बेटी ने एक ऐसे खेल को अपना करियर बनाया, जिसे सिर्फ लड़कों तक सीमित माना जाता था। आइए जानते हैं बिहार की किलकारी योजना के माध्यम से कुश्ती चैंपियन बनीं कोमल कुमारी के बारे में।

बिहार की कोमल कुमारी

21 साल की कोमल कुमारी बिहार के भागलपुर की रहने वाली हैं। कोमल कुमारी एक कुश्ती खिलाड़ी हैं। एक लड़की के लिए कुश्ती खेलना और इसे अपना करियर बनाना आसान नहीं था। कोमल कुमारी बताती हैं कि जिस समाज से वह आती हैं, वहां लड़कियों को कुश्ती खेलने का अनुमति नहीं दी जाती है। लेकिन उनका मानना था कि लड़कियां लड़कों से भी ज्यादा कर सकती हैं। लड़कियां भी कुछ बन सकती हैं।

कोमल ने कुश्ती में बनाया करियर

लड़कियां भी कुछ कर दिखा सकती हैं, इसी सोच के साथ उन्होंने कुश्ती खेलना शुरू की। फिर इसे अपनी करियर बनाया। इस प्रयास में कोमल के परिवार ने उनका साथ दिया। साथ ही किलकारी योजना और यूनिसेफ ने उनके सपने को सच करने में मदद की। किलकारी में कई सह पाठ्यक्रम गतिविधियां हैं, जो बच्चों को उनकी उम्र, योग्यता और क्षमता अनुसार सहभागिता, प्रयोग, निर्माण, प्रदर्शन और योगदान करने का एक प्लेटफार्म प्रदान करती है |

किलकारी योजना और यूनिसेफ का प्रयास

किलकारी योजना की शुरुआत साल 2008 में हुई थी। बिहार सरकार ने किलकारी योजना को वित्तीय सहायता दी है। बिहार की कई किशोरियों को आत्मनिर्भर बनाने और उनके सपने को पूरा करने में इस योजना का बड़ा योगदान है। यूनिसेफ और बिहार सरकार की सहायता से जारी किलकारी कार्यक्रम के तहत जरूरतमंद बच्चों, गर्भवती महिलाओं और किशोरियों को रजिस्टर किया जाता है और उनकी स्थिति में सुधार के लिए कार्य किया जाता है।
 
3 वर्ष पहले

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