Tech Cold War: क्या दुनिया अब तकनीक के शीतयुद्ध में प्रवेश कर रही है, जानिए कैसे इससे बदलेगी आने वाले भविष्य की तस्वीर?

औद्योगिक क्रांति ने कई नई विचारधाराओं को जन्म दिया। अगर ओद्योगिक क्रांति की शुरुआत नहीं होती, तो शायद ही कम्युनिज्म और पूंजीवाद जैसी विचारधारा आधुनिक विश्व के पटल पर अपना साकार रूप ले पाती। औद्योगिक क्रांति के चलते ही कई नई खोजों को अंजाम दिया गया। इसने आज के इस आधुनिक विश्व को गढ़ने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब हम चौथे औद्योगिक क्रांति में प्रवेश कर रहे हैं। इस दौर में 21वीं सदी पर विजय पाने के लिए कई देश डाटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम कंप्यूटिंग की दौड़ में एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। इसी के मद्देनजर कई बड़ी महाशक्तियों के बीच एक इंफॉर्मेशन वॉर चल रही है। वे एक दूसरे देशों की तकनीकों की जासूसी और उनको हथियाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि अब हम एक तकनीक के शीतयुद्ध में प्रवेश कर चुके हैं, जहां पर लड़ाई बम और बारूद से नहीं बल्कि डाटा और इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी को लेकर हो रही है।

हाल ही में कुछ साल पहले अमेरिका ने चीन पर यह आरोप लगाया था कि वह उसकी इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी को चुरा रहा है। चीन की बड़ी शातिर औद्योगिक नीति है। विदेश की जो भी बड़ी कंपनियां चीन में अपना प्लांट सेटअप करती हैं। उसे अपनी तकनीक को चीन के साथ साझा करना पड़ता है। यही एक बड़ा कारण है, जिसके चलते एप्पल, सैमसंग आदि कई कंपनियों को अपनी तकनीक को उसके साथ शेयर करना पड़ता है।

इसी वजह से चीन बड़ी आसानी से दूसरी कंपनियों के स्मार्टफोन्स, गैजेट्स या किन्हीं अन्य चीजों का क्लोन बना कर सस्ते दामों पर दुनिया भर में बेचता है। इसके अलावा चीन के ऊपर समय समय पर यह भी आरोप लगते आए हैं कि वह करेंसी मेनुपुलेसन करके व्यापार में लाभ भी उठाता है।