Ghost Murmur: दिल की धड़कन से ढूंढ निकाला पायलट! अमेरिका की इस सीक्रेट टेक्नोलॉजी ने दुनिया को चौंकाया
Ghost Murmur Technology Explained:
अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA ने एक ऐसी गुप्त तकनीक का इस्तेमाल किया, जो इंसान की दिल की धड़कन से उसकी लोकेशन पता लगा सकती है। 'घोस्ट मर्मर' नाम की यह टेक्नोलॉजी हाल ही में ईरान में फंसे एक अमेरिकी पायलट को खोजने में काम आई।

पिछले हफ्ते ईरान के दक्षिणी हिस्से में अमेरिका का एक F-15 लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। विमान में सवार वेपन सिस्टम ऑफिसर, जिन्हें दुनिया 'ड्यूड 44 ब्रावो' के नाम से जानती है, किसी तरह जिंदा बच गए। दो दिनों तक वह ईरान की बंजर पहाड़ियों और ठंडे रेगिस्तान में छिपे रहे, जबकि ईरानी सेना उन पर रखे इनाम के लालच में उन्हें चप्पे-चप्पे पर तलाश रही थी। जब उम्मीदें धुंधली होने लगीं, तब 'घोस्ट मर्मर' (Ghost Murmur) नाम के एक खामोश शिकारी ने उनकी जान बचाई।

क्या है 'घोस्ट मर्मर' और यह कैसे काम करता है?
न्यू यॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, 'घोस्ट मर्मर' को लॉकहीड मार्टिन की बेहद गुप्त डिवीजन 'स्कंक वर्क्स' (Skunk Works) ने विकसित किया है। यह तकनीक 'क्वांटम मैग्नेटोमेट्री' के सिद्धांत पर काम करती है। सरल शब्दों में कहें तो, हर इंसान की धड़कन एक खास इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फिंगरप्रिंट यानी विद्युत-चुंबकीय छाप छोड़ती है। यह तकनीक मीलों दूर से उस बेहद कमजोर सिग्नल को पकड़ लेती है और फिर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से हजोरों अन्य शोर-शराबे के बीच से केवल उस इंसान की धड़कन को अलग करके उसकी लोकेशन बता देती है।
मेडिकल साइंस में धड़कन मापने के लिए सेंसर को छाती से सटाना पड़ता है, लेकिन यह तकनीक इतनी एडवांस है कि यह लंबी दूरी से भी धड़कन पहचान लेती है। इसका नाम 'घोस्ट मर्मर' इसलिए रखा गया क्योंकि 'मर्मर' धड़कन की लय को कहते हैं और 'घोस्ट' का मतलब है उस व्यक्ति को ढूंढ निकालना जो दुनिया की नजरों में पूरी तरह गायब हो चुका है।

ईरान की बंजर जमीन बनी इस तकनीक के लिए वरदान
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान का वह इलाका इस तकनीक के पहले इस्तेमाल के लिए सबसे उपयुक्त था। वहां मानवीय आबादी कम होने के कारण अन्य इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों का शोर बहुत कम था। इसके अलावा, रात के समय रेगिस्तान की ठंडी रेत और एक जीवित इंसान के शरीर की गर्मी के बीच का अंतर इतना ज्यादा था कि इस तकनीक को अपना काम करने में आसानी हुई। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक अभी शुरुआती दौर में है और भीड़भाड़ वाले इलाकों में उतनी सटीक नहीं है, जितनी सुनसान जगहों पर।
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