हर व्यक्ति अपने जीवन में सफलता की नई ऊंचाइयों को छूना चाहता है। संसार में भी उन्हीं लोगों को याद रखा जाता है, जो अपने-अपने क्षेत्रों में सफल रहे हैं। इस कड़ी प्रतिस्पर्धा वाले दौर में सभी लोग जीतना चाहते हैं और शायद ही इससे कीमती चीज कोई और होगी। लेकिन जीतना इतना आसान नहीं होता है। जीत हासिल करने के लिए कीमत चुकानी पड़ती है, मेहनत करनी पड़ती है और किसी भी क्षेत्र में महारत हासिल करने के लिए उसमें समय बिताना पड़ता है। साथ ही, मनोबल को भी मजबूत रखना पड़ता है। आज हम आपके लिए टेक इंडस्ट्री के सुंदर पिचाई और मार्क जुकरबर्ग जैसी दिग्गज शख्सियतों के उन शानदार विचारों को पेश कर रहे हैं, जो जीवन का लक्ष्य हासिल करने में मदद करेंगे। Sundar Pichai सुंदरराजन पिचाई, जिन्हें पूरी दुनिया में सुन्दर पिचाई के नाम से जाना जाता है। सुंदर पिचाई का जन्म 12 जुलाई 1972 में तमिल नाडु की राजधानी चेन्नई में हुआ था। सुंदर पिचाई के पिता रघुनाथ पिचाई ब्रिटिश कंपनी 'जनरल इलेक्ट्रिक' में वरिष्ठ इंजिनियर थे। पिचाई ने अशोक नगर स्थित जवाहर स्कूल में 10वी कक्षा तक पढ़ाई की थी। इसके बाद उन्होंने वना वाणी स्कूल में 12वीं कक्षा में दाखिला लिया था। स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद सुंदर पिचाई ने आई.आई.टी. खरगपुर में दाखिला लिया और यहां से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की थी। सन 2004 में सुंदर पिचाई ने गूगल के साथ अपना सफर शुरू किया था। यहां उन्हें उत्पाद प्रबंधन और रिसर्च से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी शौपी गई थी। सुंदर ने कड़े प्रयासों के जरिए 2008 में गूगल क्रोम ब्राउजर को लॉन्च किया था, जिसके बाद इस ब्राउजर ने तमाम सफलताएं हासिल की थी। इन प्रयासों को देखते हुए अगस्त 10, 2015 के दिन सुंदर पिचाई को गूगल का सीईओ बना दिया गया था। Mark Zukerberg दुनिया के सबसे बड़ा सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक के सीईओ और फाउंडर मार्क जुकरबर्ग हैं। जुकरबर्ग ने भी दो साल बाद ही हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को अलविदा कह दिया था। साल 2002 में मार्क ने वहां एडमिशन लिया था और 2004 में उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी थी। वहीं साल 2013 में हावर्ड यूनिवर्सिटी ने मार्क जुकरबर्ग को मानद् उपाधि से सम्मानित किया। 2004 में ही उन्होंने फेसबुक तैयार किया था और साल के अंत तक फेसबुक के यूजर्स की संख्या 10 लाख पहुंच गई थी। आज करीब 2.4 अरब लोग फेसबुक का इस्तेमाल करते हैं। मार्क जुकरबर्ग की पत्नी प्रिसिला चान हैं। प्रिसिला ने मार्क की मुलाकात हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में ही हुई थी। प्रिसिला मेडिकल की स्टूडेंट थीं। सितंबर 2016 में, जुकरबर्ग और चान ने घोषणा की कि चान जुकरबर्ग इनिशिएटिव (सीजेडआई) में वे फेसबुक के शेयर डालते हैं। यह संस्था एक दशक में कम-से-कम तीन अरब डॉलर निवेश रिसर्च के लिए करेगी ताकि सभी बीमारियों का इलाज, रोकथाम और प्रबंधन किया जा सके। Jeff Weiner जेफरी विनर को पूरी दुनिया जेफ विनर के नाम से जानती है। जेफ का जन्म 12 फरवरी 1970 में अमेरिका के न्यू यॉर्क शहर में हुआ था। जेफ ने 1992 पेनसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के व्हार्टन स्कूल से बैचलर ऑफ साइंस इन इकोनॉमिक्स की ड्रिग्री हासिल की थी। सन 2001 में जेफ विनर याहू के साथ जुड़े और करीब सात साल बाद उन्हें कार्यकारी उपाध्यक्ष का पद मिला। इस दौरान उन्होंने 3,000 से अधिक कर्मचारियों की एक टीम का नेतृत्व भी किया था। जेफ विनर ने वार्नर ब्रदर्स ऑनलाइन के उपाध्यक्ष के रूप में काम किया था। इसके बाद जेफ 2008 में लिंक्डइन के साथ जुड़े और कड़े प्रयासों की बदौलत कंपनी को अपार सफलता दिलाई थी। इस समय लिंक्डइन के पूरे विश्व में 30 कार्यल्य हैं। वहीं, इस कंपनी का प्रॉफिट 78 डॉलर मिलियन से बढ़कर 7 बिलियन तक पहुंच गया है। Tim Cook टिम कुक का जन्म 1960 में अलबामा शहर में हुआ था। टिम ने औबर्न विश्वविद्यालय से औद्योगिक इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने ड्यूक विश्वविद्यालय एमबीए की ड्रिग्री हासिल की थी। शुरुआती दिनों में टिम कुक ने इंटेलिजेंट इलेक्ट्रॉनिक्स और कॉम्पैक कंपनी के साथ काम किया था, यहां उन्हें कार्यकारी का पद मिला था। इसके बाद सन 1998 में टिम वरिष्ठ उपाध्यक्ष के रूप में एपल के साथ जुड़े थे। हालांकि, 2011 में स्टीव जॉब्स की मृत्यू के बाद उन्होंने कंपनी का सीईओ बना दिया गया था। Jack Dorsey जैक डॉर्सी का जन्म 19 नवंबर 1976 को अमेरिका के सेंट लुइस शहर में हुआ था। जैक ने डु बौर्ग हाई स्कूल प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की थी। वह स्कूल में एक शांत लड़के के रूप में जाने जाते थे। इसके बाद उन्होंने कंप्यूटर में रूचि दिखाई थी, जिसके बाद वह स्कूल के कंप्यूटर ग्रुप में शामिल हो गए थे। हाई स्कूल के बाद जैक ने मिसौरी विश्वविद्यालय विज्ञान और प्रौद्योगिकी में दाखिला लिया था। वहीं, उन्होंने ड्रिग्री की पढ़ाई पूरी किए बगैर विश्वविद्यालय छोड़ दिया था। जैक के कैरियर की बात करें तो उन्होंने शुरुआती दिनों में एक प्रोग्रामर के रूप में काम करना शुरू किया था। सन 2000 में वह ओकलैंड चले गए थे। इसके बाद जैक ने मैसेजिंग कंपनी की शुरुआत की थी, लेकिन वह घाटे में चली गई थी। इसके बाद उन्हें कई वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा था। अक्टूबर 2006 में जैक डॉर्सी, बिज़ स्टोन, इवान विलियम्स समेत अन्य सदस्यों ने साथ मिलकर एक मैसेजिंग कंपनी का गठन किया, जिसको बाद में ट्विटर का नाम दिया गया था। इसके बाद दो सप्ताह के अंदर उन्होंने एक साइट तैयार की जहां यूजर्स 140 शब्दों के साथ मैसेज यानी ट्विट भेज या पोस्ट कर सकते थे। Sunil Bharti Mittal सुनील भारती मित्तल का जन्म सन 1957 को पंजाब के लुधिआना जिले में हुआ था। उनके पिता का नाम सतपाल मित्तल था, जो एक राजनेता थे। वह दो बार लोक सभा और एक बार राज्यसभा के सांसद रह चुके थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा मसूरी के विनबर्ग एलन स्कूल और ग्वालियर के सिंधिया स्कूल से हुई थी। इसके बाद सन 1976 में उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की थी। सुनील भारती मित्तल ने 18 वर्ष की उम्र में अपने दोस्तों के साथ मिलकर 20 हजार रुपये के निवेश के साथ बिजनेस शुरू किया था। वह हीरो साइकिल के लिए स्पेयर पार्ट्स बनाते थे। 1992 में भारत सरकार ने पहली बार मोबाइल फोन सेवाओं के लिए लाइसेंस देना शुरू किया था, तो सुनील भारती मित्तल फ्रेंच दूरसंचार समूह विवेंडी के साथ मिलकर दिल्ली समेत कई राज्यों में अपनी सेवाएं देनी शुरू कर दी था। इसके बाद सुनील भारती मित्तल ने 1995 में भारती सेल्युलर लिमिटेड (बीसीएल) की स्थापना की और एयरटेल का नाम से सेवाएं देना शुरू कर दिया था। वहीं, देखते-ही-देखते कंपनी के साथ उस समय दो लाख यूजर्स जुड़ गए थे। Satya Nadella सत्य नडेला का जन्म 19 अगस्त 1967 को हैदराबाद में हुआ था। सत्य ने हैदराबाद पब्लिक स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की थी। स्कूल पूरा करने के बाद उन्होंने मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के लिए दाखिला लिया और सन 1988 में इंजीनियरिंग की ड्रिग्री हासिल की। इसके बाद नाडेला ने अमेरिका जाकर कंप्यूटर साइंस में एम.एस किया था। सन 1992 में सत्य नडेला ने माइक्रोसॉफ्ट ज्वाइन किया है और इसके बाद उन्होंने सॉफ्टवेयर डिवीजन, ऑनलाइन सर्विसेज, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और एडवरटाइजिंग प्लेटफार्म तैयार किए थे। उनके कड़े प्रयास को देखते हुए 04 फरवरी 2014 के दिन कंपनी ने उन्हें सीईओ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) बना दिया गया था। Shantanu Narayen शांतनु नारायण का जन्म 27 मई 1963 को हैदराबाद में हुआ था। शांतनु ने शुरुआती दिनों में हैदराबाद पब्लिक स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की थी। स्कूल पूरा करने के बाद उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक एंड कॉम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग की पढ़ाई ओसमानिया विश्वविद्यालय से पूरी की थी। इसके बाद शांतनु एमबीए की पढ़ाई करने के लिए ओहियो चले गए। वहां पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सबसे पहले एपल में काम किया था। सन 1998 में शांतनु ने वरिष्ठ उपाध्यक्ष के रूप में अडोबी ज्वाइन किया था। इसके बाद 2007 में ब्रूज चिजन के सीईओ पद छोड़ने के बाद ही शांतनु नारायण को इस पद के लिए न्युक्त किया गया था। Manu Kumar Jain मनु कुमार जैन का जन्म 25 जनवरी 1981 को मेरठ में हुआ था। जैन ने मकेनिकल इंजिनियरिंग इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से बी.टेक की पढ़ाई की थी। इसके बाद 2007 में उन्होंने एमबीए के लिए इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट कलकता विश्वविद्यालय में दाखिला लिया था। मनु कुमार जैन ने पढ़ाई पूरी करने के बाद सबसे पहले जबॉन्ग में काम किया था, यहां उन्हें मैनेजिंग डायरेक्टर का पद मिला था। 2014 में जैन ने कर्मचारी के रूप में शाओमी इंडिया के साथ जुड़े थे और उनके कड़े प्रयासों को देखते हुए उन्हें कंपनी का मैनेजिंग डायरेक्टर बना दिया था। 2017 में हूगू बारा के कंपनी छोड़ने के बाद मनु कुमार जैन को ग्लोबल वाइस प्रेसिडेंट के लिए प्रमोट किया था। Ritesh Agarwal रितेश अग्रवाल का जन्म 16 नवंबर 1993 को उड़ीसा के राज्य कटक के एक मारवाड़ी परिवार में हुआ था। उनके पिता इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन के साथ काम करते है और उनकी माता हाउसवाइफ है। रितेश ने प्रारंभिक शिक्षा जिले के प्राइवेट स्कूल से पूरी की और इसके बाद इंडियन स्कूल ऑफ़ बिज़नेस एंड फाइनेंस में दाखिला लिया था। लेकिन उन्होंने बिजनेस शुरू करने के लिए अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी, क्योंकि वह अपने जीवन में मार्क जुकरबर्ग और स्टीव जॉब्स की तरह कुछ करना चाहते थे। सन 2012 में केवल 18 वर्ष की उम्र में रितेश ने अपने स्टार्टअप OREVAL STAYS की शुरुआत की। इस कंपनी का लक्ष्य यात्रियों को थोड़े समय के लिए किफायती दामों पर कमरा उपलब्ध करवाना था। जिसे कोई भी आसानी से ऑनलाइन बुक कर सकता था। इसके बाद ही रितेश को Venture Nursery से 30 लाख रुपये का फंड मिला गया था। वहीं, घाटे के चलते सन 2013 में रितेश ने OREVAL कंपनी को OYO ROOMS का नया नाम से दोबारा लॉन्च किया था।