Alert: एंड्रॉयड 14, 15 और 16 पर मंडरा रहा खतरा! फोन की हो रही साइलेंट हैकिंग, जानिए क्या है 'जीरो क्लिक' अटैक
No-Click Malware:
भारत सरकार की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने एंड्रॉइड यूजर्स के लिए गंभीर चेतावनी जारी की है। अब बिना किसी लिंक पर क्लिक किए भी आपका फोन हैक कर सकते हैं। यह खतरा एंड्रॉइड 14, 15 और 16 के नए वर्जन पर मंडरा रहा है।

भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत काम करने वाली प्रमुख एजेंसी CERT-In (इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम) ने हाल ही में एक एडवाइजरी जारी की है। इस चेतावनी में करोड़ों एंड्रॉइड स्मार्टफोन और टैबलेट यूजर्स को सतर्क रहने को कहा गया है। एजेंसी के मुताबिक, गूगल के ऑपरेटिंग सिस्टम में कई ऐसी गंभीर खामियां पाई गई हैं जिनका फायदा उठाकर साइबर अपराधी आपके डिवाइस में सेंध लगा सकते हैं। ये खामियां न केवल पुराने ऑपरेटिंग सिस्टम बल्कि बिल्कुल नए एंड्रॉइड 14, 15 और हालिया एंड्रॉइड 16-QPR 2 वर्जन में भी देखी गई हैं।

क्या है 'जीरो-क्लिक' अटैक और क्यों है खतरनाक?
आमतौर पर हमें सिखाया जाता है कि किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें या संदिग्ध एप डाउनलोड न करें, लेकिन यह नया खतरा इससे कहीं ज्यादा खतरनाक है। इसे 'जीरो-क्लिक' या 'नो-क्लिक' अटैक कहा जाता है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, इसमें हैकर्स को आपका फोन हैक करने के लिए आपकी किसी भी गतिविधि या क्लिक की जरूरत नहीं होती। वे बैकग्राउंड में चुपचाप सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर डिवाइस का नियंत्रण हासिल कर लेते हैं। ऐसे में सबसे सावधान रहने वाले यूजर्स भी खतरे की चपेट में आ सकते हैं, यदि उनका डिवाइस लेटेस्ट सुरक्षा अपडेट से लैस नहीं है।

कैसे दिया जाता है 'जीरो-क्लिक' अटैक को अंजाम?
- CERT-In की रिपोर्ट के अनुसार, हैकर्स मैसेजिंग एप्स (जैसे WhatsApp या iMessage), ईमेल, या सिस्टम एप्स में मौजूद कमियों का फायदा उठाते हैं। वे खासतौर पर तैयार किया गया डेटा पैकेट मोबाइल यूजर्स को भेजते हैं। इसमें साइलेंट कॉल, इमेज फाइल, या अदृश्य टेक्स्ट मैसेज हो सकता है।
- जब डिवाइस इस डेटा को अपने आप प्रोसेस करता है (जैसे मैसेज का प्रीव्यू बनाना या नोटिफिकेशन रेंडर करना), तो डिवाइस के भीतर छिपा हुआ मैलवेयर या स्पाईवेयर सक्रिय हो जाता है।
- इस प्रक्रिया के दौरान यूजर को कोई नोटिफिकेशन नहीं मिलता और न ही उसे किसी संदिग्ध गतिविधि का पता चलता है। हैकर इसके जरिए निजी डेटा, फोटो, कॉल रिकॉर्डिंग और लोकेशन एक्सेस कर लेते हैं।
- फोन हैक होने पर हैकर्स आपके निजी मैसेज पढ़ सकते हैं, कॉल सुन सकते हैं और आपकी बैंकिंग जानकारी जैसी संवेदनशील डेटा चोरी कर सकते हैं। इसे तकनीकी भाषा में 'प्रिविलेज एस्केलेशन' कहा जाता है, जहां हमलावर को फोन के सिस्टम पर एडमिन जैसे अधिकार मिल जाते हैं।
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