Epstein Files: क्या है Jmail? जिसने दुनिया के लिए खोल दिया जेफरी एपस्टीन के काले कारनामों का कच्चा चिट्ठा
Jmail Kya Hai:
एपस्टीन फाइल्स के चौंकाने वाले खुसासों के दुनियाभर में हलचल मची हुई है। इसी बीच Gmail के जैसा दिखने वाला Jmail नाम का एक नया टूल भी सामने आया है। जानिए इस टूल को एपस्टीन फाइल्स से क्यों जोड़कर देखा जा रहा है।

एपस्टीन फाइल्स (Epstein Files) के खुलासे के बाद दुनियाभर में तहलका मचा हुआ है। अमेरिकी न्याय विभाग (US Department of Justice) इन फाइलों को जारी कर रहा है। ये फाइल्स यूएस इन्वेस्टर जेफरी एपस्टीन (Jeffrey Epstein) के काले कारनामों से जुड़ा है। इसमें यूएस से लेकर दुनियाभर की कई नामचीन हस्तियों के अपराध और काले करतूतों से जुड़ी तस्वीरों, वीडियो और कई अहम दस्तावेजों का खुलासा किया गया है। यूएस डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस ने भी माना है कि ये दुनिया के सबसे घिनौने कामों का काला चिट्ठा है।
आम नागरिकों को इन हस्तियों के काले करतूतों का पता चले इसलिए, जस्टिस डिपार्टमेंट ने फाइल्स को अपने वेबसाइट पर अपलोड किया है। यहां जाकर कई दस्तावेजों को देखा या डाउनलोड किया जा सकता है। हालांकि, यह प्रक्रिया आसान नहीं है और कई लोगों को इसमें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में एपस्टीन फाइल्स को जानने के लिए बनाया गया Jmail इस काम को आसान बना रहा है।

आखिर क्या है Jmail और इसकी जरूरत क्यों पड़ी?
दरअसल, अमेरिकी न्याय विभाग इन फाइलों को समय-समय पर जारी करता रहता है। लेकिन सरकारी वेबसाइटों से इन्हें डाउनलोड करना और लाखों पन्नों में से काम की जानकारी ढूंढना एक आम आदमी के लिए पहाड़ चढ़ने जैसा है। इसी समस्या का हल निकाला है सॉफ्टवेयर इंजीनियर ल्यूक इगेल और राइली वाल्ज ने। उन्होंने मिलकर Jmail नाम का एक पोर्टल तैयार किया है। यहां J का मतलब जेफरी एपस्टीन के नाम के पहले लेटर J से ही है।
यह पोर्टल देखने में में हूबहू गूगल के Gmail जैसा है। चूंकि दुनिया भर में करोड़ों लोग जीमेल इस्तेमाल करते हैं, इसलिए उन्हें Jmail चलाने में कोई परेशानी नहीं होती। यह टूल कोई नई फाइलें पैदा नहीं करता, बल्कि पहले से मौजूद सरकारी डेटा को बहुत ही व्यवस्थित तरीके से पेश करता है।

AI की मदद से पढ़ने लायक बनी धुंधली फाइलें
एपस्टीन मामले की कई पुरानी फाइलें ऐसी थीं जिन्हें ठीक से स्कैन नहीं किया गया था और उन्हें पढ़ना नामुमकिन था। ल्यूक और राइली ने यहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR) तकनीक का सहारा लिया। इस तकनीक के जरिए धुंधले और खराब दस्तावेजों को डिजिटल टेक्स्ट में बदल दिया गया ताकि लोग उन्हें आसानी से पढ़ सकें और कीवर्ड डालकर सर्च भी कर सकें।
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