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निष्काम की महिमा

                
                                                         
                            संसारी से प्रीतड़ी, सरै न एको काम |
                                                                 
                            
दुविधा में दोनों गये, माया मिली न राम ||


संसारियों से प्रेम जोड़ने से, कल्याण का एक काम भी नहीं होता| दुविधा में तुम्हारे दोनों चले जयेंगे, न माया हाथ लगेगी न स्वस्वरूप स्तिथि होगी, अतः जगत से निराश होकर अखंड वैराग्ये करो|


स्वारथ का सब कोई सगा, सारा ही जग जान |
बिन स्वारथ आदर करे, सो नर चतुर सुजान ||


स्वार्थ के ही सब मित्र हैं, सरे संसार की येही दशा समझलो| बिना स्वार्थ के जो आदर करता है, वही मनुष्य विचारवान - बुद्धिमान है |
7 वर्ष पहले

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