जाँ निसार अख़्तर साहब 20वीं सदी के उर्दू ज़ुबान के मशहूर शायर थे। जिनके शेर, ग़ज़ल और नज़्म आज भी लोगों की जु़बाँ पर है। उन्होंने कई ग़ज़लें, रुबाइयां, नज्में और शायरी लिखी हैं। जाँ निसार अख़्तर साहब की कलम ने रूमानियत को एक अलग ही नज़ाकत भरे अंदाज में पेश किया। जाँ निसार अख़्तर फ़िल्मों के विख्यात गीतकार रहे। उन्होंने हिंदी सिनेमा को एक से एक हिट गाने दिए हैं और अपनी कलम से कई खूबसूरत गीतों को सजाया जिनमें आंखों ही आंखों में,ये दिल और उनकी निगाहों के साये,आजा रे जैसे न जाने कितने ही गाने शामिल हैं।
पेश है जाँ निसार अख्तर की दिल छू लेनी वाली शायरी
ये इल्म का सौदा ये रिसाले ये किताबें
इक शख़्स की यादों को भुलाने के लिए हैं
मैं जब भी उस के ख़यालों में खो सा जाता हूँ
वो ख़ुद भी बात करे तो बुरा लगे है मुझे
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