काव्य के विशेष कार्यक्रम 'शख़्सियत' में इस बार मेहमान होंगी कलम के ज़रिए इबारतें लिखने वाली ममता कालिया। ममता कालिया का गद्य की हर विधा में एक सार्थक हस्तक्षेप है। उनकी कहानियां तो सामाजिक-विमर्श करती ही हैं उनके निबंध में भी गंभीर चिंतन है। इसके साथ ही उन्होंने भावों के महीन धागों को बुनते हुए कई कविताएं भी लिखीं। उनकी कविताओं में स्त्री चिंतन के स्वर मुखर होते हैं साथ ही जीवन की छोटी-छोटी चेष्टाओं के पुट भी हैं। उनका लिखा साहित्य उनकी संवेदनशीलता का स्पष्ट उदाहरण है।
ममता कालिया का जन्म 2 नवम्बर 1940 को वृन्दावन में हुआ था। उनकी शिक्षा दिल्ली, मुंबई, पुणे समेत विभिन्न शहरों में हुई। साहित्य सृजन के गुर उन्हें अपने पिता विद्याभूषण अग्रवाल से मिले। वह आकाशवाणी में कार्यरत थे और अंग्रेजी व हिंदी साहित्य के विद्वान थे।
उनकी लिखी सम्पूर्ण कहानियां 'ममता कालिया की कहानियां' के नाम से दो खंडों में प्रकाशित हुई हैं। उन्होंने छुटकारा, एक अदद औरत, सीट नं. छ:, उसका यौवन, जांच अभी जारी है जैसी कई कहानियां लिखी हैं। उनके लिखे उपन्यासों में प्रेम कहानी, लड़कियाँ, एक पत्नी के नोट्स, दुक्खम् - सुक्खम् आदि शामिल हैं।
दुक्खम्-सुक्खम् के लिए उन्हें वर्ष 2017 के प्रतिष्ठित व्यास सम्मान से सम्मानित किया गया था। यह उपन्यास मथुरा शहर की पृष्ठभूमि पर आधारित है। इसके अलावा उन्हें अभिनव भारती सम्मान, साहित्य भूषण सम्मान, यशपाल स्मृति सम्मान आदि से भी सम्मानित किया जा चुका है।
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