रघुवीर सहाय: चेतना पत्रकार की और संवेदना कवि की...

रघुवीर सहाय: चेतना पत्रकार की और संवेदना कवि की...
                
                                                             
                            "एक शोर में अगली सीट पे था
                                                                     
                            
दुनिया का सबसे मीठा गाना
एक हाथ में मींजा दिल था मेरा
एक हाथ में था दिन का खाना।"


रघुवीर सहाय प्रगतिशील काव्यधारा 'नई कविता' के प्रतिनिधि कवि हैं। उनकी कविताओं का मूल स्वर यथार्थ का है, जो मूल रूप से आज़ादी के बाद के भारत का यथार्थ है। अज्ञेय के संपादन में प्रकाशित 'दूसरा सप्तक' के कवि के रूप में रघुवीर सहाय की साहित्यिक परिवेश में बहुत चर्चा हुई। उनके साहित्य में पत्रकारिता का और उनकी पत्रकारिता पर साहित्य का गहरा असर रहा है। रघुवीर सहाय की चेतना पत्रकार की तथा संवेदना एक कवि की है। यही कारण है कि ख़बरों का और रोज़मर्रा की हलचल का बेहद नायाब प्रयोग उनकी कविता में दिखाई पड़ता है।

पत्रकारिता एवं साहित्य कर्म में रघुवीर सहाय कोई फ़र्क़ नहीं मानते थे। पत्रकारिता के क्षेत्र में भी उन्होंने एक नई और क्रिएटिव भाषा गढ़ी। भाषा को लेकर एक ख़ास चेतना और अनूठा शिल्प रघुवीर सहाय की कविताओं की अपनी अलग पहचान बनाते हैं।  आगे पढ़ें

5 months ago

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