किस्सा कुछ यूं था कि अंग्रेज़ों को चिढ़ाने के लिए एक कुत्ता लाया गया और उसका नाम नेल्सन रखा गया लेकिन इसके बाद कोई गैर-मामूली वाक़िया पेश नहीं आया था जब तक कि एक शाम मेफ़ेयर सिनेमा घर में ये हादसा ना हो गया।
हुआ यूं कि मजाज़, अली सरदार जाफ़री और सिब्ते हसन निहायत शान से अपने कुत्ते नेल्सन के साथ सिनेमा घर पहुंचे और चार टिकट खरीदकर हॉल से अंदर दाखिल होने लगे लेकिन दरवाज़े पर उन्हें रोक दिया गया। बड़ी देर तक हंगामा होता रहा कि नेल्सन भी फ़िल्म देखेगा लेकिन आख़िर में सिनेमा के मैनेजर ने उन्हें राजी किया और पैसे देकर वापस भेज दिया। तभी एक टामी जो शराब के नशे में धुत था, वह नेल्सन को अपने बेद से छेड़ने लगा।
तीनों ने एक साथ कुत्ते को आवाज़ दी
तीनों ने एक साथ कुत्ते को आवाज़ दी - नेल्सन तो टामी कुत्ते को छोड़कर उनकी ओर दौड़ा कि तभी कुछ कश्मीरी दोस्त आ गए और टामी के साथ घूंसेबाज़ी करने लगे। वह कश्मीरी दोस्त हर घूंसे के साथ नेल्सन का नारा बुलंद करता और कुत्ता और भी ज़ोर से भौंकने लगता। आख़िर टामी थककर बेहाल हो गया और उसने सुलह की पेशकश कर दी।
लेकिन इसमें सबसे कमाल ये था कि वहां घूंसे चल रहे थे और मजाज़ उनकी गत पर चुटकी बजाकर नाच रहे थे।
साभार- लखनऊ की पाँच रातें
राजकमल प्रकाशन
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तीनों ने एक साथ कुत्ते को आवाज़ दी
6 वर्ष पहले
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