मैं मुंबई में पैदा हुआ। अर्थशास्त्र से एम.ए. करने के बाद मैं प्रोफेसर बन गया। लेकिन साहित्य में बचपन से ही मुझे रुचि थी। इसलिए अध्यापन के साथ-साथ लेखन को मैंने महत्व दिया। बचपन से ही साहित्य में कविताओं की तुलना में कहानियां मुझे ज्यादा आकर्षित करती थीं। इसलिए बतौर लेखक मैंने छोटी कहानियों और हास्य-व्यंग्य में ही ज्यादा हाथ आजमाया। मुझे इसका अफसोस जरूर है कि मेरे हास्य-व्यंग्यकार रूप को तुलनात्मक रूप से उतनी पहचान नहीं मिली। रचनात्मक लेखन में जीवन का बड़ा रूपक गढ़ने के बजाय छोटे-छोटे दृश्यों के जरिये कहानी कहना मुझे ज्यादा अच्छा लगता है। मुंबई से मेरा बहुत भावुक और मजबूत रिश्ता रहा।
इसी के तहत मैंने मुंबई के इतिहास की गहराई से खोज कर उसे लिपिबद्ध किया। मेरी ज्यादातर कहानियां मुंबई की पृष्ठभूमि की हैं। मेरी कहानियों के ज्यादातर पात्र भी एकल या संयुक्त परिवारों में रहने वाले शहरी हैं। अर्थशास्त्र की जानकारी ने शहरी मध्यवर्ग की कहानियां लिखने में मेरी मदद की। मैंने अपने जाने-पहचाने परिवेश की कहानियां लिखने को ही हमेशा वरीयता दी, क्योंकि एक अर्थशास्त्री होने की वजह से कल्पना में मैं बहुत यकीन नहीं करता। मुझे साहित्य अकादेमी पुरस्कार आत्मकथा के लिए मिला, जिसमें मेरी अपनी साहित्यिक यात्रा तो दर्ज है ही, उस दौर का और तत्कालीन मित्र साहित्यकारों का ब्योरा भी विस्तार से दर्ज है। एक लेखक के तौर पर स्थान और काल हमेशा मेरे लिए बेहद महत्वपूर्ण रहे हैं।
-विख्यात मराठी लेखक
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