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स्मृति शेष : हिंदी कथा के अप्रतिम हस्ताक्षर दूधनाथ सिंह

दूधनाथ सिंह
                
                                                         
                            समय-समाज से तीन चौथाई सदी से ज्यादा का अनुभव लेकर उसे आधी सदी से ज्यादा समय के साहित्य सृजन को समर्पित करने वाले दूधनाथ ने कथा लेखन, उपन्यास, आलोचना सहित साहित्य की अन्य विधाओं पर भी समान रूप से रचते हुए पूरी साफगोई से अपने समय की पड़ताल की।
                                                                 
                            

 नए संदर्भों में समय को सुनते-पढ़ते, उसका मूल्यांकन, पुनर्पाठ करते हुए निरंतर रचनारत दूधनाथ को देश के राजनीतिक मुद्दों पर तर्कपूर्ण राय जाहिर करते हुए, एक सक्रिय एक्टिविस्ट के रूप में हमेशा देखा गया। आगे पढ़ें

‘आखिरी कलाम’ के एक वर्ष के भीतर तीन संस्करण निकले।

8 वर्ष पहले

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