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जब कवि अशोक वाजपेयी ने सोनिया गांधी को लिखी चिट्ठी

अशोक वाजपेयी और सुधीश पचौरी
                
                                                         
                            मशहूर कवि और आलोचक अशोक वाजपेयी ने एक बार सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखकर ये कहा था कि सेक्युलर इस देश में तब तक नहीं सफल हो सकते जब तक वे अध्यात्म से नहीं जुड़ेंगे। अशोक वाजपेयी का मानना है कि अध्यात्म को नकारने से एक शून्य पैदा हुआ। 
                                                                 
                            

अशोक वाजपेयी का मानना है कि 'हिंदू उत्पीड़ित हो रहा है' यह विचार हिंदू समाज में धीरे-धीरे आया है। ये बहुत ही जटिल समस्या है। वे कहते हैं कि बहुत साल पहले जब दृश्य पर ये लगा रहा था कि कुछ संस्थाएं एक प्रबल राजनीतिक शक्ति के रूप में उभरने वाली हैं और ख़ुद को सिर्फ़ सेक्युलर घोषित कर देने भर से  इसका सामना नहीं किया जा सकता, तो उस समय वे ऐसे मसलों पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री समेत बहुत से लोगों को चिट्ठियां लिख दिया करते थे। 

वाजपेयी ने बताया कि एक बार उन्होंने सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखी। उन्होंने लिखा, "सेक्युलर इस देश में तब तक नहीं सफल हो सकते जब तक अध्यात्म से नहीं जुड़ते।" यानि आप अध्यात्म को धार्मिक अनुष्ठान से मुक्त करें ये तो ठीक है, लेकिन उसको कोई जगह तो चाहिए। वाजपेयी का मानना है कि उत्तर भारत में प्रगतिशीलता से प्रतिबद्ध लोगों ने ऐसा वातावरण पैदा कर दिया कि धर्म और अध्यात्म दोनों अछूत हो गए। उससे एक शून्य पैदा हुआ। वाजपेयी कहते हैं कि विराट से जुड़ने की आकांक्षा मनुष्य की एक स्वाभाविक आकांक्षा है। ये कुत्ते, बिल्ली या गिलहरी की आकांक्षा नहीं हो सकती। क्योंकि विराट है, उससे हमारा कुछ तादात्म्य है, उससे हमारी कुछ निस्बत है, लगाव है। ये जो शून्य पैदा हुआ उसमें तमाम शक्तियां घुसपैठ कर गईं। 

धर्मनिरपेक्षता के बारे में वाजपेयी कहते हैं कि अव्वल तो ये शब्द ही अटपटा है। गांधी जी ने जो एक शब्द चलाया था 'सर्वधर्म संभाव' उसमें फिर भी कोई संभावना थी। वाजपेयी के मुताबिक इस मामले में वामपंथ की जो भूमिका है वो बहुत ही निंदनीय रही है क्योंकि उन्होंने साहित्य और कलाओं में भी भेद किया और उसे अलग कर दिया। 

अशोक वाजपेयी कहते हैं कि ये कोई दार्शनिक कल्पना या अनुष्ठान नहीं है जब कुंभ में एक करोड़ लोग एक नदी में स्नान करने जाते हैं। ये एक लोमहर्षक घटना है। मनुष्य के इतिहास में ये एक अभूतपूर्व घटना है। वे कहते हैं कि दुनिया के किस भाग में एक करोड़ लोग एक नदी में स्नान करने सिर्फ़ इसलिए चले जाएं कि उनकी किसी एक धर्म में आस्था है। वाजपेयी बताते हैं कि कुंभ के बारे में मशहूर कथाकार निर्मल वर्मा ने एक निबंध लिखा था तो लोग उनपर टूट पड़े और आलोचना करने लगे कि निर्मल वर्मा तो हिन्दुत्ववादी हो गए! लेकिन उसी समय त्रिलोचन ने भी कुंभ पर कविताएं लिखीं उन पर कोई नहीं टूटा क्योंकि वो तो वामपंथी और बनारस के थे! तो ये जो अध्यात्म की अवमानना हुई है इसने जो शून्य पैदा किया है इसको भरना आसान नहीं होगा।" 

अशोक वाजपेयी ने अपने विचार अमर उजाला फाउंडेशन की नई पहल - बैठक सीरीज - की पहली बैठक में अपने विचार व्यक्त किए थे और इस कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध मीडिया समालोचक और लेखक सुधीश पचौरी ने भी हिस्सा लिया था। 
8 वर्ष पहले

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