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अल्हड़ शोख अंदाज के साथ शो मैन की फकीराना सोच

राज कपूर
                
                                                         
                            शो मैन राज कपूर का अल्हड़ शोख अंदाज और दुनिया की फिकर करने की अनुपम सोच इस गीत को अन्य गीतों से अलग खड़ा करती है। 1959 में रिलीज अनाड़ी फिल्म का यह गीत आज भी भागमभाग में लगी इस दुनिया के किसी चमकते और आगे जाते बाशिंदे को ठहरने पर मजबूर कर सकता है । एक युवा का यहां ठहरना इसलिए जायज हो जाता है क्योंकि इस गीत में जीवन के सबसे हसीन सच का बखान जो किया गया है । 
                                                                 
                            
 

आदमी अपनों की ओट में जीना चाहता है...

पैसा और यश कमाकर भी आदमी अपनों की ओट में जीना चाहता है । वो चाहता है कि आगे जाने की एक सीमा के बाद वह किसी के काम आए ताकि वह दूसरों की मदद कर अपने जीवन को सफल बना सके । राजकपूर हमें इस गीत में शायद यही याद दिला रहे हैं। गीत में राजकपूर किस तरह से महानगर मुंबई की भीड़ में भी सड़क पर चल रहे एक छोटे से कीट का ध्यान रखते हैं और उसे आदमी के पांव में नीचे आने से पहले उसे एक कागज के टुकड़े में उठाकर बचा लेते हैं। 
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आदमी अपनों की ओट में जीना चाहता है...

6 वर्ष पहले

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