ई-मेल के बग़ैर भी मेल आ गया,
बुझते चिराग़ में भी तेल आ गया।
अभी तो चुनाव बहुत दूर है मगर,
फ़सादों का पुराना खेल आ गया।
मुश्किल बहुत है बाॅल को रोकना,
बल्ला चलाने क्रिस गेल आ गया।
कुछ पल सुकूं के गुज़ारने थे उसे,
इसलिए वो लीडर जेल आ गया।
बोफोर्स का जलवा भूले भी नहीं,
फिर सियासत में राफेल आ गया।
एक आईना हो गया टुकड़े-टुकड़े,
चेहरा सामने जो बे-मेल आ गया।
पैसा नहीं था हसरतें खरीदने को,
लिखा इसलिए नो-सेल आ गया।
ज़फ़रुद्दीन ज़फ़र
एफ-413,
कड़कड़डूमा कोर्ट,
दिल्ली-32
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