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सुषमा स्वराज

                
                                                         
                            सुषमास्वराज 
                                                                 
                            

हे बहु भाषी,परम विदुषी,तुम्हें यूं तो नहीं जाना था,
घाटी से 370 हटने का, अभी तो जश्न मनाना था ।

मातृभूमि का प्रतिबिंब तुम,साहस का पर्याय थीं,
मजबूरी में फंसे लोगों का, एकमात्र उपाय थीं,
संवेदना की देवी तुम,सदा सर्वजन हिताय थीं,
भारतीय नारी के वर्चस्व का,सबसे उत्तम अध्याय थीं ।

मुख में सरस्वती,वैभव में लक्ष्मी,शौर्य में दुर्गा समान थीं,
कुशल वक्ता, प्रबुद्ध नेता, कीर्ति में आसमान थीं,
सहज स्वभाव, आत्मीय भाव, एक अनुपम इंसान थीं,
भारतीय सभ्यता संस्कृति की, उत्कृष्ट पहचान थीं ।

अखंड भारत का सपना अभी तो , साकार बनाना था,
हे बहु भाषी,परम विदुषी,तुम्हें यूं तो नहीं जाना था ।।

-Author Vivek Sharma



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7 वर्ष पहले

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