हकीकत कुछ और है----
जग में जो दिखता वो सही नहीं होता है,
लोगों का कथन भी हकीकत नहीं होता है l
मृग को धूप की रेत में जल का भृम होता है,
मानव जो अपने दिखते उसमें तम होता है l
हर चमकने वाली चीज सोना नहीं होता है,
चमक दमक को देखके प्राणी जीवन खोता है l
हमको नित सूरज चलता हुआ दिखाई देता है,
वास्तव में पृथ्वी गतिशील सूर्य स्थिर होता है l
प्रकृति के नियामक भिन्नता से पूर्ण होते हैं,
तो हम मानव किस खेत की मूली होते हैं l
-बीपी सिंह यादव
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