स्त्री जब प्रेम करती है,
कभी सीता सी अग्नि परीक्षा , तो
कभी उर्मी सा इंतजार करती है ,
कभी मिलन तो कभी विरह सहती है
कभी अहिल्या सा पत्थर बनती तो
कभी सावित्री बन यमराज से लड़ती है
हां जब एक स्त्री प्रेम करती है।
कभी राधा सा वियोग सहती तो
कभी रुक्मिणी सा प्रेम करती है ,
कभी सती सा सब त्याग करती
तो कभी पार्वती सी तपस्या करती है।
एक स्त्री जब प्रेम करती है ,
द्रोपदी सा अपमान सहती तो
कभी लक्ष्मी बन चरणों मे रहती है
हां,जब एक स्त्री प्रेम करती है ।
कभी मीरा सा जहर पीती तो
कभी पद्मावती सा जौहर करती है
जब एक स्त्री प्रेम करती है।
-वर्तिका
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