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तन्हाई में बैठा नजर ना आता 'उपदेश'

                
                                                         
                            मेरी तरह किसी के इंतजार में टिकी।
                                                                 
                            
सादगी से सुसज्जित उसकी आशिकी।।

संदेश देने का तरीका रुआबदार उसका।
सपने साथ के देखती एक कदम बाकी।।

वक्त के बिना पूछे उसने दूरी लिख ली।
अब एक दूसरे में जरूरत छुपी साक़ी।।

चादर की तरह हमने भी यादे ओढ़ रखी।
कभी-कभी दिख जाती ख्वाब में झाँकी।।

तन्हाई में बैठा नजर ना आता 'उपदेश'।
तस्वीर धुंधली ही सही शायद रही लकी।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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53 मिनट पहले

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