तेरे दर पर आ गया हूँ तूँ क्यों नही निहारे।
इतनी सी है गुजारिश मेरे खोल बन्द पिटारे।।
भला चाहने के खातिर कर्म कर लिये सारे।
सारे काम मुश्किल लगते हम है तेरे सहारे।।
तन्हा आसरा माँगने की जुर्रत करके देखी।
अपना घर परिवार निखारा कब मुझे निखारे।।
बिगाड़े वक्त को बदलकर घाव भर जरा।
नखरे उठाए तुम्हारे अब तक हम नहीं हारे।।
इम्तिहान जितना लेना जी भर ले 'उपदेश'।
मुझसे मुँह जो मोड़ा हम हो जायेगे बेसहारे।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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