मेरी परेशानी को समझने वाला कोई नही।
नस दब रही शायद खोलने वाला कोई नही।।
याद करती अपनी जवानी को जो खो गई।
रोज लिखती कहानी पढ़ने वाला कोई नही।।
लोग कहते मुझको सिर-फिरा जानबूझकर।
मेरी नादानियों से प्यार करने वाला कोई नही।।
मैं जिसके प्यार में खोई उससे छुपाती नही।
मगर आँखों का पानी पोछने वाला कोई नही।।
हर किसी का दाना-पानी कौन बदल पाया।
शायद 'उपदेश' अमल करने वाला कोई नही।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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