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कैद में परिंदे

                
                                                         
                            एक खुला मैदान,
                                                                 
                            
उसमें नीम का पेड़।
उस पर बसते परिंदे,
सीमाओं की पकड़।

इंसान की फितरत निराली,
कैद करते आजाद परिंदे।
खरीदें बेचे जाते परिंदे,
परिंदो का व्यापार धाकड़।

जो भी बिताने आते राते,
वो नस्लों को पैदा करते।
'उपदेश' पालते पोसते,
कैद में आते वो कहाँ चगड़।

उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद

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4 वर्ष पहले

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