आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

इश्क में जनाब कुछ तो बात होगी।

                
                                                         
                            मेरे हिस्से का ख्वाब लाजवाब है।
                                                                 
                            
किस किस तरह से देता सवाब है।।

साँसों की हलचल से व्याकुल नही।
साथ में हर कृत्य तुम्हारा नायाब है।।

ग़म दूर-दूर तक महसूस होता नहीं।
आनंदित करता हर एक जबाव है।।

आँखों में बरसों से ठहरे समुन्द्र के।
किनारे-किनारे लहर का प्रभाव है।।

इश्क में जनाब कुछ तो बात होगी।
'उपदेश' के ऊपर उसका रुआब है।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर