अपने आप को बदलो प्रकृति को नहीं
Save. Tree~ Save. Water~ Save. Paper
इधर प्रकृति का तमाशा बनेगा,
उधर मानुषों की जिंदगी घटेगी |
सजादो धरा को पौधों से अभी तुम,
बाद में तो जिंदगी कुछ ना बचेगी |
बचाओ तुम पानी फैलाने से रोको,
भविष्य में तो प्यासें सब की बढ़ेंगी |
तेजेन्द्र यादव.....
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