आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

खुशनुमा एहसास

Rain of love
                
                                                         
                            मौसम है सुहाना, बारिश का समां
                                                                 
                            
ऐसे में कितना सुखद हो तेरा आना।
बारिश की फुहारों में,इन मदमस्त बहारों में मन का इठलाना,
ऐसे में कितना सुखद हो तेरा आना।
तेरे प्यार की बरखा में मन भीग-भीग जाए
लेकिन कितना बेपरवाह है कि तू दूर से तरसाए
कैसी नालायक, बेदर्द ये बरखा है
जो तेरी कमी का एहसास दिलाती है।
जैसे ही छू गई एक बूंद मुझे,
लगा तेरे होठों ने छुआ हो मुझे,
ये छुअन और भी तड़पा गई,
मन में एक मीठी सी टीस जगा गई।
ऐ काश ये बरखा फिर आए,
और तू मुझे अपनी बांहों में झुलाए,
हर बूंद में तेरे चुंबन का एहसास हो
भूल जाऊं ये दुनिया गर तू जो मेरे साथ हो।

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।

8 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर