मेरी पलकें जो हैं मूंदती तो फ़ना होती हैं
आंख खुलती है तो फिर लौट के बसती दुनिया
मेरे जेहन में न जानें क्यों ये आता है ख़याल
अक़्स तेरा मेरे ख़्वाबों ने तराशा होगा।
नाचते आसमां पे जो थे हज़ारों तारे,
पहन के झिलमिल सुर्ख-ओ-नीले लिबास
गुम हुए ढक के कहीं अपने-अपने चेहरे
मेरी पलकें जो मूंदी, रात उन्हें लील गयी।
मैंने देखा कि मैं-तुम हम-बिस्तर हैं,
चूमते हो तुम मुझे आगोश में लिए हुए
पागल हो गये हो तुम, या फिर मैं दीवानी,
अक़्स तेरा मेरे ख़्वाबों ने तराशा होगा।
ढह रहीं टूट के ज़न्नत की दर-ओ-दीवारें,
आग है सर्द हुई ख़ौफनाक दोज़ख़ की,
शैतान, फ़रिश्ते, मुझे छोड़ो, दफ़ा हो जाओ
मूंंदकर मेरी पलकों ने दुनिया को लील लिया।
ऐसा लगता है, तुम लौट आये मेरे पास,
वादा निभाने में बड़ी देर कर दी तुमने,
मेरे हुश्न के साथ तेरी याद भी हुई धुंधली,
अक़्स तेरा मेरे ख़्वाबों ने तराशा होगा।
काश, किया होता तूफ़ान-बगूले से इश्क़,
बहार आती है तो वे भी आ जाते हैं।
मैंने मूंद लीं हैं भारी पलकें अपनी,
सारी दुनिया घुप अंधेरे में डूब गयी।
अक़्स तेरा मेरे ख़्वाबों ने तराशा होगा।
सिल्विया प्लैथ (Sylvia Plath) की मैड गर्ल'स लव सॉन्ग (Mad Girl's Love Song) का भावानुवाद;
देबदास छोटराई द्वारा उड़िया में भी अनुवादित
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