नदी किनारे
बगुला बैठा
एक टाँग पर ध्यान लगाये
गीत गा रहा था वह तो
सुर पर सुर लगाये
सुनकर उसके मधुर गीत को
मछलियों का झुंड आया
झट से अपनी चोंच खोलकर
मछली एक दबाया
उड़ गया दूर कहीं
फिर नजर न आया ॥
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