कैसे करूँ???
लफ्ज़ नहीं खुलते सामने तेरे,
मैं इज़हार कैसे करूँ?
इस भागती हुई दुनिया में,
जीने का इकरार कैसे करूँ?
बड़ी तवज्जो से संभाला हूँ खुद को,
इस जाहिल से शहर में प्यार कैसे करूँ?
बड़ी हुस्न की दुकाँ है तेरी,
मैं इसमें खरीददार कैसे करूँ?
रात चाँद से पूछा है पता तेरा,
सितारों से बताने में इनकार कैसे करूँ?
मुद्दतों हुई खुद को खुद से मिलाये हुए,
मैख़ाने में बैठा उस रब से गुलजार कैसे करूँ?
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