सारे जग की इस धरा पर
दिखते हैं कई मनुष्य मगर,
जो नैया हमारी पार लगाते
वो हमारे प्रिय, शिक्षक कहलाते।
खुद को अंधेरे में रखते हैं
औरों के जीवन को उज्ज्वलित करते हैं,
लक्ष्य प्राप्ति और नैतिकता की, सीख हमेशा देते
वो हमारे प्रिय, शिक्षक कहलाते।
चींटी हमको सिखलाती कठोर परिश्रम करना
गुलाब एहसास कराते काँटों में भी खिलना,
ऐसे ही दुष्कर समर में हमको लड़ना सिखलाते
वो हमारे प्रिय, शिक्षक कहलाते।
कभी न करते अपनी परवाह
लगी रहती है शिष्यों की चिंता,
वही हमारी राह में सहजता लाते
वो हमारे प्रिय, शिक्षक कहलाते।
कभी न करना उनका अपमान
करना हमेशा मान सम्मान,
वही हमारी राह को सहज बनाते
वो हमारे प्रिय, शिक्षक कहलाते।
राष्ट्र के हैं वही निर्माता
हम सबके हैं भाग्य विधाता,
उन देवभवों के चरणों में हम अपना शीश झुकाते
वो हमारे प्रिय, शिक्षक कहलाते।
सन्तोष यादव
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