जल ही जीवन का चालक है
इसकी न मौजूदगी सबसे घातक है,
यही जीने का आधार हमारा
अब घटता जा रहा ये जल सारा।
बर्बादी का कारण है बनता
क्यों करती है ये सब जनता,
बचाने का था प्रयास हमारा
अब घटता जा रहा ये जल सारा।
विरासत से हमें उपहार में मिलता
पर अग्रिमों को खोता हुआ दिखता,
न जाने वो लेंगे किसका सहारा
अब घटता जा रहा ये जल सारा।
क्या देंगे जबाब उन्हें हम कल को
पूछेंगी ये सवाल अग्रिम पीढ़ी हमको,
कहां है हमारे हक का पिटारा
अब घटता जा रहा ये जल सारा।
नहीं पड़ रहा असर मनुष्य के पत्थर दिल पर
खुद करके अनदेखा उंगली उठाता औरों पर,
यही रहा तो एक दिन मिट जायेगा सर्वस्व हमारा
अब घटता जा रहा ये जल सारा।
सन्तोष यादव
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