सुना था शिक्षा बंधनों से
मुक्त करती है
देखा भी कुछ को बंधनों से
मुक्त हो गए
ताहिर को तज़ कर हज़रत की
गोद में बैठे
सामाजिक बंधनों से भी
उन्मुक्त हो गए
-कुँवर संदीप सिंह
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