आरोप लगने का कभी भी, करो नहीं परवाह
पर कलंक न लगे कभी भी, चलना ऐसी राह
लोग कहेंगे कुछ उसको, न सुनकर दोगे टाल
पर जब तुम्हारा जमीर ही, बन जाएगा काल
मारेगा मरोगे भीतर से, बाहर न होगी आवाज
यही समझकर सारे कर्म, करो सही से आज
-कुँवर संदीप सिंह
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