तेरा मुझसे लिपट कर प्यार करना याद आता है।।
बता मैं क्या करूं गर यार मिलना याद आता है।।
क्या तुझको भी कभी मेरी कमी महसूस होती है,,
या मुझको ही तेरा तक़रार करना याद आता है।।
कहाँ वो फ़ूल गुलशन के कहाँ ये शूल नफ़रत के,,
बदन बाहों में तेरा गिरफ़्तार करना याद आता है।।
अभी भी वक़्त हैं आ जा के अभी चल रही साँसे,,
क़ज़ा है सामने पर पतवार चलना याद आता है।।
कोई ऐसी दवा है क्या जो मिटा दे ज़िंदगी अपनी,,
अभी इन सांसों को कर्जदार करना याद आता है।।
कोई तो रास्ता होगा जो मुझ तक पहुंचता होगा,,
कहाँ जाऊं के तेरा घर द्वार सजना याद आता है।।
कमी महसूस होती है तो ये आँखें भीग जाती देव,,
अभी तक भी तेरा वो इंतज़ार करना याद आता है।।
-सुनील देव
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