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ईद मुबारक....

                
                                                         
                            रोजा टूटा तीस दिनों का,अब बीत गया रमजान।
                                                                 
                            
अब जकात की है बारी, ओ मेरे प्यारे अब्बूजान।।
शीर खुरमा और सेवइयाँ, मिल बाँट कर खाएँगे।
ईद मुबारक दे देकर हम, सबको गले लगाएँगे।।

जो मयस्सर हुई हमें, चलो शुकराना अदा करें।
ईमान ही अपनी इबादत, आओ हम सजदा करें।।
कुदरत का है एक नियम, जो देंगे वही तो पाएँगे।
नहीं जरूरत नफरत की,हम मोहब्बत बगराएँगे।।

सच मुझे ये लगता अब्बू, नही जरूरत जंग की।
बारूद की फसल नही, धान की बाली ढंग की।।
क्यों रार मचा रमजान में,बताओ न अम्मीजान।
ईद मुबारक जीवन उतरे, एक है सबकी जान।।
-रोशन साहू 'मोखला' 
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5 महीने पहले

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