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नीरज चोपड़ा

                
                                                         
                            खामोशी छा गई गगन में,
                                                                 
                            
उदास हो गई धरा।
जब तुमने छुपाकर दर्द को,
मुस्कान बिखेर दी जहां में।
बेसक हुए लगातार फाउल,
पर पहन लिया सिराने चांदी का ताज।
हर युवा के दिल में ,
एक हलचल सी दौड़ गई।
दिल ने भरकर आगोश में ,
किया अभिनंदन अश्कों संग।
यह सिलसिला चलता रहा,
चांदी के भंवर में खोता रहा।
जो खड़ी की थी इमारत तुमने सोने की,
पल भर में बदल गई चांदी में।
पर तुम उदास न होना ,
दिल की मोहब्बत आज भी वैसी है।
खामोशी छा गई गगन में,
उदास हो गई धरा।
दिल के दरवाज़े पर ,
जो सजे थे मोहब्बत के फूल।
खिली है लालिमा अब भी वैसी,
दिल के हर कोने में।
बस दिल की धड़कने बढ़ गई है,
दिल हो चला है खामोश।
खामोशी छा गई गगन में,
उदास हो गई धरा।
 
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2 वर्ष पहले

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