यह जीवन की आपाधापी , यह मानव-दौड़ की हाफा-हाफी , यह उपलब्धियों का प्यार ,
यह महत्वाकांक्षाओ की मार , इन सबसे युक्त स्वयं को बतौर मानव देखकर ,
स्वयं ही , स्वयं के प्रति संवेदी दया उभर आती है अपार ......!
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