हे कृष्ण तुम्हारा वन्दन है , अभिनन्दन है , पथ चन्दन है , यह वृंदावन है , यदुवंश हुये , नंदवंश हुये , करने को वध तुम कंस हुये , धरा को तुम अधर्म के तम मुक्त किये , हे कृष्ण तुम्हारा वंदन है , अभिनन्दन है....! कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक बधाईयाँ
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।
आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
कमेंट
कमेंट X