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दिल में गुजरे लम्हों की एक किताब रखना

                
                                                         
                            दिल में गुजरे लम्हों की एक किताब रखना
                                                                 
                            
गम भुलाये खुशी उसका हिसाब रखना I

ता-उम्र कौन यहां किसका साथ देता है
इन आंखों में कई सजाएं ख्वाब रखना I

वक्त के साथ उजाले भी जाए रूठ अगर
अपनी पलकों पे छुपा आफताब रखना I

बे-मुरव्वत है दुनिया सवाल उठाएगी
हो गवारा उन्हें तैयार जवाब रखना I

मय की तलब हमें तो दर उसके ले आयी है
प्याले में दो बूंद जरूर शराब रखना I

आदाब, तहजीब, मोहब्बत भुले लोग यहां
आफत है बचाएं खुद को जनाब रखना I

तरसे जमी आसमा की छांव में रहकर
मुश्किल में जिंदगी डाले नकाब रखना I

छुप जा बादलों मे उसकी नज़र ना लगे
सूरत-गर1 वो चेहरे पर हिजाब रखना I

सूरत-गर1=चित्रकार

राकेश मौर्य , बी- ९०८, मेट्रो रेजीडेंसी ,नेतिवल,कल्याण-४२१३०६, महाराष्ट्र
यह रचना मेरी स्वरचित हैI प्रकाशन हेतु भेज रहे है I धन्यवाद I
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3 वर्ष पहले

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