प्रसन्न रहा कीजिये
वही आप पर जंचता है,
प्रेम रखिये हृदय में
उससे चेहरा निखरता है.
पवित्र विचार केशों को
मुलायम रखते हैं,
उत्तम आत्माओं के
व्यक्तित्व दूर से दमकते हैं.
विचार सबके आपने
आत्मा सभी के पास,
तारतम्य यदि दोनों में,
मनुष्य हो ना कभी हताश.
भूख में गूलर भी भले,
और प्यास में मद्य का पान,
शिक्षा दुर्जन से भी मिले,
तो बैठ लीजिये ज्ञान.
प्रेम मंत्र सबसे बड़ा,
मोहित होवे व्याघ्र,
घृणा दुरुयोधन ने करी,
खोए भ्रात, राज औ प्राण.
धन मेहनत से ऊपजा,
सुखकारी ही होय,
कमाई बिना पसीने की,
गहरे नाम डुबोय.
बातें इतनी कीजिये,
जो कानों खूब सुहाऐं,
अर्थहीन रही गुफ्तगु,
बुद्धि भ्रष्ट कर जाए.
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X