तुम जाना मत
मगर तुम जाना मत,
वह रोज़ तुम्हें भगाएगा,
हर दिन धमकी देगा—
“जा, चली जा, जहाँ जाना है!”
मगर तुम उसकी बातों में आना मत।
जिस दिन तुम सच में चली गई,
उसी दिन वह कहानी बनाएगा—
“मैं तो उस लड़की को पहले से जानता था,
उसका चरित्र ही सही नहीं था,
वह घमंडी थी…”
अपने दोस्तों की बातें भी गिनाएगा—
“हमने तो पहले ही कहा था,
इतनी पढ़ी-लिखी लड़की
तेरे साथ टिक नहीं पाएगी,
एक दिन ज़रूर भाग जाएगी।”
वह तुम्हें सताएगा,
धमकियाँ भी देगा,
मगर तुम एक भी बात मत सुनना,
अपने सच से पीछे मत हटना।
तुम निभाकर दिखाना
कि सच्ची औरत कैसी होती है—
जो हर अन्याय को सहती नहीं,
बल्कि अपने आत्मसम्मान के साथ
अपने सच पर खड़ी होती है।
शादी से पहले लड़के कहते हैं—
“बाबू, मैं तुम्हारे लायक नहीं हूँ,
तुम मुझसे शादी मत करो।”
लड़की यही सुनकर पागल होती है—
“देखो, कितना ईमानदार है!”
और वही लड़का शादी के बाद
उसे इंसान समझना भी भूल जाता है,
कुत्ते के बराबर भी सम्मान नहीं देता।
मगर तुम जाना मत—
उसके झाँसे में मत आना।
वह तुम्हें गलत साबित करने की कोशिश करेगा,
तुम्हारे जाने के बाद
अपने हर गलत को सही बताएगा।
तुम अपने सच पर डटी रहना,
क्योंकि कई बार
जो सबसे ज़ोर से तुम्हें गलत कहता है,
असल में वही
अपने अपराध का पर्दा ढूँढ़ रहा होता है।
— रजनी
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