एक लड़की की आँखों देखी कहानी
एक लड़की की आँखों देखी कहानी,
बताती हूँ अपनी मुँहज़ुबानी।
दूसरों का भला करने की धुन में,
उसने अपनी उम्र गुज़ार दी,
खुद काबिल थी या नहीं,
पर दूसरों का बोझ सिर पर उठा लिया।
जिनकी मदद की, उन्होंने उसे पागल कहा,
और जिनसे मदद करवायी,
उन्होंने भी तानों के जूते मार दिए।
अब वह चुपचाप सोचती है—
जिसके लिए लड़ती हूँ, वही जूते मारता है,
जिससे लड़कर मदद करवाती हूँ,
उसके भी जूते खाने पड़ते हैं।
आज वह खुद बीमार है,
मगर उसके बारे में कोई नहीं सोचता।
बस यहीं कहीं उसका दिल भर गया—
दूसरों का भला करते-करते।
— रजनी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X