निकलेगा गुबार, कलेजे से फट कर
जब कहूंगा अलविदा, तुझे पलट कर
कौन तसल्ली देगा, मेरी तन्हाई को
काश के तू रोती, मुझ से लिपट कर
अब कारवां-ए-ज़िन्दगी, अकेली चलेगी
खत्म हुई दोस्तों की, तादात घट कर
ना कोई साया बचा, ना कोई सूरत बाकी
आज रखूंगा मैं ये, आईना उलट कर
काश हमारी भी, मोहब्बत परवान चढ़ती
मेरा दिल रह गया, तेरे दिल में सिमट कर
ना बचेगी "ख़ाक", भी तेरी यादों की
जब उठेगी तेरी डोली, मुझ से कट कर।
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