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प्रणय गीत

                
                                                         
                            मैं आऊँ जब तेरे आंगन
                                                                 
                            
वो घर मन्दिर बना देना
बनना तुम आराध्य मेरे
मुझे आराधना बना लेना ।
मैं नदिया बनके आऊंगी
मैं लहरें बन रिझाऊंगी
मुझे आगोश में प्रियतम
समन्दर बन समा लेना ।
मधुर हो जब तलक श्वर तो
अकेले गुनगुना लेना
भर आये दर्द से जब दिल
तो श्वर मेरा मिला लेना ।
सहूंगी टूटकर हर ग़म
रहे बस तेरी दम तक दम
सजल हो जब नयन मेरे
जरा तुम मुस्करा देना ।
छोड़ कर कुटिया बाबुल की
तुम्हारे महल आऊंगी
बनूं न रुक्मिणी राधा
मुझे मीरा बना लेना ।।
-पुष्पेन्द्र गोकुल प्रसाद 'अनन्तू'

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6 वर्ष पहले

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