माँ की ममता का कोई मोल नहीं,
माँ के जैसा कोई भी अनमोल नहीं l
माँ के जैसी खुशबू नहीं किसी गुलाब में,
माँ के जैसा कोई फूल नहीं किसी बाग में l
माँ सबसे नायाब बेशकीमती नगीना है,
माँ के बिना जीना भी क्या जीना है l
माँ के आंचल में भरी है निर्मल ममता,
सब कुछ सहने की रखती है जो क्षमता l
माँ जैसा दुनिया में कोई और किरदार नहीं,
माँ की ममता और माँ के जैसा कहीं प्यार नहीं l
कोई तो जैसे देवी कोई ममता की मूरत है,
माँ के रूप में नजर आती ईश्वर की सूरत है l
किसी वरदान किसी उपहार जैसी है,
मेरी माँ मेरे लिए मेरे भगवान जैसी है l
-पुष्पा साहू मीरा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X