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तेरे सितम की कसम

                
                                                         
                            ए सितमगर तेरे किए गए हर सितम की कसम,
                                                                 
                            
न कभी ज़ुबां से निकलेगी आह, तेरे दिए हर ज़ख्म की कसम,

हो बेशक जग-हँसाई, न रूसवा होने देंगे मोहब्बत,
तुझ संग जो लगी लगन हमें उस लगन की कसम,

इश्क ही खुदा, खुदा ही इश्क है , बुतकदा का सजदा करेंगे ता-उम्र,
अहद-ए-वफ़ा निभाएंगे मर्ग तक, ये खाते हैं कसम, कसम की कसम,

ए खुदा मेरे यार की बेवफ़ाई न देखना, होगी उसकी भी कोई मजबूरी,
वो बेवफ़ा नहीं, मुझे है यकीं उसकी चाहत के ग़म की कसम,

है गुज़ारिश ए दुनियां वालो न देना कोई इल्ज़ाम मुझे,
ग़र लगा लूं लबों से हलाहल, नहीं जीना यार बिना जुदाई की कसम,

दम-ए-आखिर है और ऑंखें भी खुली काश दीदार-ए-यार सो जाए,
न हुआ दीदार-ए-यार तो मरने के बाद खुली रहेंगी ऑंखें यार की कसम।

-प्रेम बजाज 
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2 वर्ष पहले

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