आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

संघर्ष ही जीवन है

                
                                                         
                            जीवन का एक पर्याय नाम संघर्ष भी है ।।
                                                                 
                            
लड़कर मुश्किलों में धीरता और वीरता से,
जीतकर मिलता जैसे यहां तब हर्ष भी है ।।
संघर्ष करते करते पीना पड़ सकता है यहां,
कड़वे नीम के जैसा कोई घूट भी है ।।
सामना करे जो कठिनाइयों का और न,
घबराए कठिनाइयों से तो प्राप्य करने को,
जैसे मृदुल से उस फ़ल की छूट भी है ।।
मध्य संघर्ष के नग्न पगों से कभी उन,
जलते हुए अंगारों पर चलना तुझे होगा ।।
बढ़ अग्रेतर नुकीले से उन कंटकों से बिन्धना,
भी होगा, इस तरह तब तू निखर सा जाएगा ।
कुंदन सा तपकर तू तब सुवर्ण सा बन जाएगा ।
विधाता भी कुम्हार की तरह तुझे अंदर से,
पीटकर बाहर से दे सहारा तेरे जीवन में,
आनंद की बहार जरूर ले आएगा ।।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर