जीवन का एक पर्याय नाम संघर्ष भी है ।।
लड़कर मुश्किलों में धीरता और वीरता से,
जीतकर मिलता जैसे यहां तब हर्ष भी है ।।
संघर्ष करते करते पीना पड़ सकता है यहां,
कड़वे नीम के जैसा कोई घूट भी है ।।
सामना करे जो कठिनाइयों का और न,
घबराए कठिनाइयों से तो प्राप्य करने को,
जैसे मृदुल से उस फ़ल की छूट भी है ।।
मध्य संघर्ष के नग्न पगों से कभी उन,
जलते हुए अंगारों पर चलना तुझे होगा ।।
बढ़ अग्रेतर नुकीले से उन कंटकों से बिन्धना,
भी होगा, इस तरह तब तू निखर सा जाएगा ।
कुंदन सा तपकर तू तब सुवर्ण सा बन जाएगा ।
विधाता भी कुम्हार की तरह तुझे अंदर से,
पीटकर बाहर से दे सहारा तेरे जीवन में,
आनंद की बहार जरूर ले आएगा ।।
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