सिर्फ नौ दिन ही तुम चिल्लाओगे
माता कह कह कर भरमाओगे
आते दसवां दिन बाहर कर आओगे
जिसके पैर पखारते हो आज तुम
कल उसी पर लाते बरसाओगे
देख उसे सड़को पर मरोगे सीटी
कभी आँख नाक मटकाओ गे
जिसे दिखाते हो दीपक आज तुम
कल तुम जिन्दा उसे जलाओगे
सिर्फ नौ दिन ही तुम चिल्लाओगे
माता कह कह कर भरमाओ गे
पूजन को ढूंढ़ते फिरते हो कन्या
खुद की तो कोख में ही मिटाओगे
मिल जाए कोई कलि मुस्काती सी
नोच कर तुम उसका मुँह दबाओगे
आज तो ओढ़ाते हो लाल चुनरी
कल जिस्म से रेशा खींच लाओगे
सिर्फ नौ दिन ही तुम चिल्लाओगे
माता कह कह कर भरमाओगे
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