शुभ दीपावली
लो आ गयी फिर से दीवाली,
ले कर खुशियां अपने साथ,
कितने ही बिछड़े लोगों ने,
थाम लिया एक दूजे का हाथ।
दीपावली का पर्व है पावन,
जगमगाता है घर का आंगन,
लेकर उमंगें आया यह दिन,
भरने को हर एक का दामन।
रंगोली ने किया रंगबिरंगा समां,
हर चौखट पे जैसे सिमट आया हो आसमान,
टिमटिमाने लगी जब मोमबत्तियाँ प्यारी,
जाग उठा यह सोया जहाँ।
पटाखों की ध्वनि गूंज रही है,
हर गली गलियारे में,
दिल की कलियां खिली हुई हैं,
दीपों के उजियारे में।
है पावन बहुत ही पर्व यह,
शुभता बिखरी है हर कहीं
दुल्हन सी सजी अपनी इस धरा को,
बस नज़र ही न लग जाये कहीं।
- श्रावणी जौहरी
बरेली, उत्तर प्रदेश
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